35 टिप्पणियाँ

T-18/4 बस इक ठोकर से तेरी करिश्मा हो गया है-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

बस इक ठोकर से तेरी करिश्मा हो गया है
पता है दिल हमारा नगीना हो गया है

बदन ऐ झील तेरा सुनहरा हो गया है
ये किसके आगमन से उजाला हो गया है

चला कब ज़ोर उसका हमारी हठ के आगे
”अँधेरा तिलमिला कर सवेरा हो गया है”

तक़ाज़े इश्क़ के भी बहुत जायज़ हैं आँखो
बक़ाया साल भर का किराया हो गया है

कभी बख़्शे जो तुमने ग़मों के फूल उनसे
अदब की सल्तनत में इज़ाफ़ा हो गया है

हमारे बाद भी सब हमारा नाम लेंगे
हमारे जीते-जी ही ये पक्का हो गया है

यहाँ से आगे है दिल सफ़र आवारगी का
सुना है उम्र भर का बयाना हो गया है

हमारी मुट्ठियों में कहा था हिन्द होगा
तुम्हारा चुटकियों में सफ़ाया हो गया है

बदन का चाँद उतरा नज़र की कश्तियों में
सो जगमग इक तलब का सितारा हो गया है

इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’ 09818354784

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35 comments on “T-18/4 बस इक ठोकर से तेरी करिश्मा हो गया है-इरशाद ख़ान ‘सिकंदर’

  1. बस इक ठोकर से तेरी करिश्मा हो गया है
    पता है दिल हमारा नगीना हो गया है ..Kya kahne Irshaad bhaai ! Waah! Waah!

  2. ‘सिकंदर’साहब,

    ‘यहाँ से आगे है दिल सफ़र आवारगी का’ कैसा अच्‍छा मिसरा है।
    और ये शे’र
    बदन का चाँद उतरा नज़र की कश्तियों में
    सो जगमग इक तलब का सितारा हो गया है
    वाह । मुबारक हो।

  3. तक़ाज़े इश्क़ के भी बहुत जायज़ हैं आँखो
    बक़ाया साल भर का किराया हो गया है….wahh dada..kya behatreen ghazal hui hai…girah bhi bahut behatreen hai.daad qubule’n..sadar
    – Kanha

  4. ग़ज़ल के सिकंदर के कलाम पर इरशाद के सिवा क्‍या कहें ?

    सारी ग़ज़ल हमेशा की तरह अच्‍छी लेकिन ये शे’र बहुत साल तक साथ रहेगा भाई :

    तक़ाज़े इश्क़ के भी बहुत जायज़ हैं आँखो
    बक़ाया साल भर का किराया हो गया है

    सादर
    नवनीत

  5. kya khoob andaaze bayan hai

    हमारी मुट्ठियों में कहा था हिन्द होगा
    तुम्हारा चुटकियों में सफ़ाया हो गया है

    daad qabool karen.

  6. Bahut khoob Irshaad bhai! Hamare jite ji hi ye pakka ho gaya hai…aameen!!

    Aap ki ghazlo se Adab ki saltnat mein izafa ho gaya hai…dili daad kubul kijiye.

  7. इरशाद साहब
    आपकी इस बेहतरीन ग़ज़ल के लिए दिली दाद !!!
    आपकी ग़ज़ल का हमेशा इन्तिज़ार रहता है
    तक़ाज़े इश्क़ के भी बहुत जायज़ हैं आँखो
    बक़ाया साल भर का किराया हो गया है
    WAAAH

  8. Irshad Bhai bahot khoobsrat ghazal hui hai.. mubarkbaad aur dili daad!!

  9. कभी बख़्शे जो तुमने ग़मों के फूल उनसे
    अदब की सल्तनत में इज़ाफ़ा हो गया है

    बदन का चाँद उतरा नज़र की कश्तियों में
    सो जगमग इक तलब का सितारा हो गया है
    आ. इरशाद सा. बहुत खुबसूरत अशहार हुये हैं दिली मुबारकबाद कबूल फरमाएं
    सादर

  10. बहुत अच्छी ग़ज़ल है सिकंदर साहब….मुबारकबाद….

  11. HO SAKE TO HAME BHI APNI MEHFIL MEIN SHAAMIL KAR LIJIYE.

  12. Kya khena hai, Lafz ek se ek shandaar. Bahut Bahut Mubarak.

  13. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है सिकंदर साहब। शे’र दर शे’र कमाल किया है आपने। दिली दाद कुबूल कीजिए।

  14. यहाँ से आगे है दिल सफ़र आवारगी का
    सुना है उम्र भर का बयाना हो गया है

    इरशाद भाई आसानी से मेरे लिए हासिल-ए-ग़ज़ल शेर, बिल्कुल अपना सा लगा ये शेर , वाह इस मकाम तक पहुँचने के लिए बहुत बहुत बधाई ….

    पूरी ग़ज़ल बहुत पसंद आई और हाँ

    हमारे बाद भी सब हमारा नाम लेंगे
    हमारे जीते-जी ही ये पक्का हो गया है

    यक़ीनन …. 🙂

  15. बस इक ठोकर से तेरी करिश्मा हो गया है
    पता है दिल हमारा नगीना हो गया है
    दिल का दाग़ कोहनूर से कम नहीं होता !! जिनके पास है वो जानते हैं !! वाह !!
    बदन ऐ झील तेरा सुनहरा हो गया है
    ये किसके आगमन से उजाला हो गया है
    इस शेर मे पसमंज़र में सूरज छुपा है !!बहुत ख़ूब !! झील के कई इम्कान हैं !!!
    चला कब ज़ोर उसका हमारी हठ के आगे
    ”अँधेरा तिलमिला कर सवेरा हो गया है”
    गिरह पर दाद !! वाह !! वाह !!!
    तक़ाज़े इश्क़ के भी बहुत जायज़ हैं आँखो
    बक़ाया साल भर का किराया हो गया है
    सानी मिसरे की गढन दिल जीत लेने वाली है !!! एक दो पुराने शेर याद आया इरशाद भाई !!!
    ये उन आँखों का सहरा कह रहा है
    कोई दरिया भी नीचे बह रहा है

    बदन को साँस की कीमत चुकाकर . किराये दार घर में रह रहा है –मयंक
    कभी बख़्शे जो तुमने ग़मों के फूल उनसे
    अदब की सल्तनत में इज़ाफ़ा हो गया है
    दिल गया रौनके हयात गई
    गम गया सारी काइनात गई – जिगर ने गहरी बात कही थी – सच है गमो के फूल ही अदब की ज़ीनत हैं बहुत खूब !!! मर्मस्पर्शी शेर है
    हमारे बाद भी सब हमारा नाम लेंगे
    हमारे जीते-जी ही ये पक्का हो गया है
    कोई शक नहीं !!
    यहाँ से आगे है दिल सफ़र आवारगी का
    सुना है उम्र भर का बयाना हो गया है
    क्योंकि अब मंज़िलें ठोकर पर रहेंगी –इसलिये उम्र भारत का बयाना हो गया है –वाह !!
    हमारी मुट्ठियों में कहा था हिन्द होगा
    तुम्हारा चुटकियों में सफ़ाया हो गया है
    मुठ्ठियों और चुटकियों का इस्तेमाल अच्छा किया है !!!
    इरशाद ख़ान के ‘सिकंदर’ होने मे कोई शक नहीं – टैलेण्ट और उसकी ताबिन्दगी दूर दूर तक दिखाई देती है !! बहुत बहुत बधाई इरशाद भाई !! इस गज़ल का इंतज़ार भी था –मयंक

  16. Sikandar bhai, khoobsurat matla, achchi tazmeen aur kabhi bakhshe jo tumne sher hasil e ghazal sher.. waaah! behad mubarkbaad!!
    Asif Amaan

  17. “कभी बख्शे जो….. ” और “हमारी मुट्ठियों में …” दिल में जो बातें उठ रही हैं काश मेरे पास शब्द होते तो कुछ कहता। सलाम आप को।

  18. बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है इरशाद भाई… मतला बहुत पसंद आया.. तक़ाज़े इश्क़ के भी बहुत जायज़ हैं आँखों
    बक़ाया साल भर का किराया हो गया है ये शे’र तो बेहद खूबसूरत है… दाद कुबुलें

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