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रात गहरी हुई है आंसू से-दिनेश नायडू

रात गहरी हुई है आंसू से
शम्म भी बुझ रही है आंसू से

कैसे लिख पाउँगा तुम्हारा नाम
डायरी भर चुकी है आंसू से

मेरे अंदर जो चुप थी तन्हाई
आज कल बोलती है आंसू से

वरना सहरा न हो गया होता
मेरे घर में नमी है आंसू से

अब्र का ग़म किसी ने क्या जाना
झील, दरिया, नदी है आंसू से

मैं उसे कब का खो चुका होता
बात बनती रही है आंसू से

ये धुंआ ज़िन्दगी का है यारो
मेरी सिगरेट जली है आंसू से

लफ्ज़ में वरना कोई मानी क्या
शाइरी शाइरी है आंसू से

मैं अकेला कभी नहीं रहता
अब मिरी दोस्ती है आँसू से

दिनेश नायडू 09303985412

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4 comments on “रात गहरी हुई है आंसू से-दिनेश नायडू

  1. कैसे लिख पाउँगा तुम्हारा नाम
    डायरी भर चुकी है आंसू से

    मेरे अंदर जो चुप थी तन्हाई
    आज कल बोलती है आंसू से

    वरना सहरा न हो गया होता
    मेरे घर में नमी है आंसू स…kya kehne bhaiya..lajawab…wah wah…daad..sadar
    -kanha

  2. बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई है दिनेश भाई
    सभी शेर बहुत पसंद आये
    वाह वाह

  3. dinesh bhai kya kahoon?
    aapne aansuon se jo ujala phailaaya hai
    usse meri ankhon ki raushni badh gayi maloom hoti hai
    mubarakbaad qubool keejiye…

  4. aisi tedhi radeef hai ki kya kaha jaaye..par ghazal khuub hui hai dinesh.. waah

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