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शह्‍र तारीक, नज़र धुंधली, ख़राबा तारीक-तुफ़ैल चतुर्वेदी

शह्‍र तारीक, नज़र धुंधली, ख़राबा तारीक
दिल था तारीक तो फिर होनी थी दुनिया तारीक

मैं समझता था कि आँधी में जलेगा मिरा दीप
कर गया मेरा मकां एक ही झोंका तारीक

तेरे चेहरे की धनक अबके बरस भी न खिली
हमने ख़्वाबों का ये मौसम भी गुज़ारा तारीक

फिर मिरी बात को समझे नहीं मेरे साथी
ये सहीफ़ा भी मिरे दिल ने उतारा तारीक

पौ तो फूटी है दिखायी नहीं देता कुछ भी
कर दिया दिल के अँधेरे ने सवेरा तारीक

इक सियह ख़्वाब उजाले का पता क्या देता
जाँ थी तारीक तो फिर होनी थी दुनिया तारीक

देख कर हाल मिरा लौट गये साथ के लोग
मेरे ज़ख्मों ने किया लोगों का रस्ता तारीक

तुफ़ैल चतुर्वेदी                                                                                   09810387857

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4 comments on “शह्‍र तारीक, नज़र धुंधली, ख़राबा तारीक-तुफ़ैल चतुर्वेदी

  1. शह्र तारीक, नज़र धुंधली, ख़राबा तारीक
    दिल था तारीक तो फिर होनी थी दुनिया तारीक

    मैं समझता था कि आँधी में जलेगा मिरा दीप
    कर गया मेरा मकां एक ही झोंका तारीक

    is zameen pe aise she’r…ye bus dada hi kar sakte hain….

    पौ तो फूटी है दिखायी नहीं देता कुछ भी
    कर दिया दिल के अँधेरे ने सवेरा तारीक….wahh wahhh. .dil khush ho gya…sadar pranam
    -kanha

  2. मुश्किल रदीफ पर गज़ल कही गई है , रस्ता . दुनिया , सवेरा , झोका और ख़राबा संज्ञा काफियों गुज़ारा उतारा क्रिया काफियों पर जो सानी मिसरे कहे गये हैं वो आसान ज़ुबान नहीं हो सकते थे लेकिन आसान ज़ुबान हुये हैं – इसके बाद गिरह ऐसी लगाई गई है कि गज़ल ज़ुबान के लिये आसान हो गई है – ऐसी गज़ले कहने के लिये आपको तस्व्वुर से ले कर ज़मीन तक सभी मरहलों पर मशक्क़त करनी पड़ती है और फिर भी यह खतरा बना रहता है कि एक नितांत नया शिल्प शाइरी की दुनिया मे किस प्रकार स्वीकार किया जायेगा – तुफैल साहब –चौथी सम्त जाने के लिए ही बने हैं और ज़ाहिर है कि गज़ल कामयाब है – विशेष रूप से मतला और पौ तो फूटी है …. जैसे शेर सामईन और पाठको के बेहद नज़दीक चले आने मे समर्थ हैं !!! इस ग़ज़ल की कीमत वो बेहतर आँक सकते हैं –जिन्हे मुश्किल ज़मीनो पर आज़माइश करने का तज़रिबा है – दादा !! इस गज़ल के लिये आपको बहुत बहुत बधाई !!!

  3. सीधे दिल में उतर जाए ऐसे अश’आर

    पौ तो फूटी है दिखायी नहीं देता कुछ भी
    कर दिया दिल के अँधेरे ने सवेरा तारीक
    ………………….

  4. मुश्किल ज़मीन में ज़ोरदार ग़ज़ल! मतले पर क़ुर्बान जाऊं!

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