6 टिप्पणियाँ

धनक कमरे में मेरे भर गयी है-स्वप्निल तिवारी

किरन इक मोजज़ा सा कर गयी है
धनक कमरे में मेरे भर गयी है

उचक कर देखती थी नींद तुमको
लो ये आँखों से गिर कर मर गयी है

ख़मोशी छिप रही है अब सदा से
ये बच्ची अजनबी से डर गयी है

खुले मिलते हैं मुझको दर हमेशा
मिरे हाथों में दस्तक भर गयी है

उसे कुछ अश्क लाने को कहा था
कहाँ जा कर उदासी मर गयी है..?

उजालों में छिपी थी एक लड़की
फ़लक का रंग-रोगन कर गयी है

वो फिर उभरेगी थोड़ी सांस भरने
नदी में लह्र जो अन्दर गयी है

स्वप्निल तिवारी 08879464730

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6 comments on “धनक कमरे में मेरे भर गयी है-स्वप्निल तिवारी

  1. उचक कर देखती थी नींद तुमको
    लो ये आँखों से गिर कर मर गयी है

    ख़मोशी छिप रही है अब सदा से
    ये बच्ची अजनबी से डर गयी है

    खुले मिलते हैं मुझको दर हमेशा
    मिरे हाथों में दस्तक भर गयी है

    उसे कुछ अश्क लाने को कहा था
    कहाँ जा कर उदासी मर गयी है..?

    वो फिर उभरेगी थोड़ी सांस भरने
    नदी में लह्र जो अन्दर गयी है।।……..

    दादा क्या बेहतरीन ग़ज़ल है….सारे अश’आर मोती हैं…वाह वाह …एक से बढ़ कर एक शे’र हैं…बधाई क़ुबूल करें…सादर प्रणाम
    -कान्हा

  2. swapnil bhaiya …..bahut bahut bahut pyari gazal huii hai …waaah.
    sachmuch ak jaadu sa hai aapke zuban me …speechless
    matle se pahle hi aankhon me dhanak si ban gaiii….

    उचक कर देखती थी नींद तुमको
    लो ये आँखों से गिर कर मर गयी है

    ख़मोशी छिप रही है अब सदा से
    ये बच्ची अजनबी से डर गयी है

    खुले मिलते हैं मुझको दर हमेशा
    मिरे हाथों में दस्तक भर गयी है

    उसे कुछ अश्क लाने को कहा था
    कहाँ जा कर उदासी मर गयी है..?…kya kahun….superb

    is pyari si gazal ke liye apko dheron daad.

    with regards

  3. स्वप्निल भाई इस ग़ज़ल के चंद शेर आपसे फोन पर सुने थे. सचमुच बाकमाल ग़ज़ल हुई है. मुबारकबाद!

  4. This is black magic… This is it ..

    I met a poet and then my life changed !!

  5. जादू है या तिलिस्म तुम्हारी ज़बान में ….आप लफ़्ज़ों से सतरंगी चादर सी बुन देते हैं. मयंक ने वो सब कह ही दिया हैं जो मैं कह सकता था सो मुझे उनके कहे में शरीक और गवाह मानिये

  6. स्वप्निल तुम्हारे कलम मे वाकई चमत्कार है !!! –एक दादा का शेर है –अब्र का टुकड़ा रुपहला हो गया // चाँदनी बरसेगी पक्का हो गया !!!! –इस शेर का पिक्चर पोर्ट्रिट मुझे हमेशा अपील करता है –अल्फाज़ की मुसव्विरी –एक कला है जो सीखने की कोशिश के बावज़ूद उसी को हासिल होती है जिसपर यज़दाँ की मेहर हो !!!
    किरन इक मोजज़ा सा कर गयी है
    धनक कमरे में मेरे भर गयी है
    सिर्फ रोशनी की एक किरन जब हासिल हुई तो इम्कान सतरंगे हो गये !! कई सम्भावनाओं के द्वार एक छोती सी उमीद के जागने से खुल गये !! क्या खूब मंज़रकशी है !!!!
    उचक कर देखती थी नींद तुमको
    लो ये आँखों से गिर कर मर गयी है
    अंखडियाँ झाईं पड़ी पंथ निहार निहार !! हसरते दीद ने आँखों की नींद चुरा ली –लेकिन क्या खूब मुहाबरा तराशा है –ये आँखों से गिर कर मर गयी है—शिल्प के अरूज़ के साथ भाषा को भी सामर्थ्य देती है ये शाइरी !!
    ख़मोशी छिप रही है अब सदा से
    ये बच्ची अजनबी से डर गयी है
    सानी मिसरे की तश्बीह लाजवाब है !! इसी बात पर एक शेर कह दूँ !!

    खुशी मुझसे अभी सहमी हुई है
    ये बच्ची अजनबी से डर् गई है –मयंक

    खुले मिलते हैं मुझको दर हमेशा
    मिरे हाथों में दस्तक भर गयी है
    दस्तक हाथो मे भर जाना !!! क्या बात है !! इसका रिवर्स गियर मै कह दूँ — कोई दस्तक कोई ठोकर नहीं है
    तुम्हारे दिल मे शायद दर नहीं है –मयंक

    उसे कुछ अश्क लाने को कहा था
    कहाँ जा कर उदासी मर गयी है..?
    शक न कर मेरी खुश्क आँखों पर // यूँ भी आँसू बहाये जाते हैं !!!!
    उजालों में छिपी थी एक लड़की
    फ़लक का रंग-रोगन कर गयी है
    तस्व्वुर क्या खूब है !! जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि – इस शेर पर दाद !!!

    वो फिर उभरेगी थोड़ी सांस भरने
    नदी में लह्र जो अन्दर गयी
    जो सामाजिक संचेतना अभी दिखे अभी लुप्त हो गई वो फिर लौटेगी –इस बत को खूब मंज़र में बाँधा है !!
    स्वप्निल तुम्हारे हाथ चूम लूँ !! कमाल ही कमाल करते हो !!! –मयंक

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