7 टिप्पणियाँ

तेरे सिवा कुछ सोच न सकने वाला मैं-दिनेश नायडू

तेरे सिवा कुछ सोच न सकने वाला मैं
पल-पल तेरे ध्यान में रहने वाला मैं

मौसम के ढब लिखने-पढ़ने वाला मैं
ख़ुद को ख़ुद ही शायर कहने वाला मैं

कुहरा जैसे तल्ख़ धुआँ हो सिगरेट का
और सहर के हाथ में जलने वाला मैं

रौनक़ का हर बिंब मिटाने वाली रात
घोर अंधेरा फिर भी चमकने वाला मैं

आख़िर तेरे दर पर आ कर बैठ गया
था दश्तो-सहरा में भटकने वाला मैं

लम्हा-लम्हा रंग बदलने वाला तू
लम्हा-लम्हा जुड़ने-बिखरने वाला मैं

देख नयी बातें भी करना सीख गया
सिर्फ़ तिरी ही बातें करने वाला मैं

तेरी याद दिलाने वाली सूनी शाम
और अकेले रोने-हँसने वाला मैं

सन्नाटे के होश उड़ाने वाली चीख़
क्या कर बैठा चुप-चुप रहने वाला मैं

नदियाँ जा कर सागर से मिल जायेंगी
सोच यही हर वक़्त बरसने वाला मैं

दिनेश नायडू 09303985412

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7 comments on “तेरे सिवा कुछ सोच न सकने वाला मैं-दिनेश नायडू

  1. Baani ki is mushkil zameen me pyare phool khilaye hain aapne Dinesh bhaai! Dili daad!

  2. क्या कहने दिनेश भाई …….बहुत उम्दा ग़ज़ल हुई है वाह वाह वाह….सभी शेर ही खूबसूरत हैं…
    ढेरों दाद कुबूल कीजिये

  3. jaandaar shandaar adbhut ghazal dinesh..shuru se aakhir tak har she’r qayamat…

    तेरे सिवा कुछ सोच न सकने वाला मैं
    पल-पल तेरे ध्यान में रहने वाला मैं

    मौसम के ढब लिखने-पढ़ने वाला मैं
    ख़ुद को ख़ुद ही शायर कहने वाला मैं

    कुहरा जैसे तल्ख़ धुआँ हो सिगरेट का
    और सहर के हाथ में जलने वाला मैं

    रौनक़ का हर बिंब मिटाने वाली रात
    घोर अंधेरा फिर भी चमकने वाला मैं

    देख नयी बातें भी करना सीख गया
    सिर्फ़ तिरी ही बातें करने वाला मैं

    तेरी याद दिलाने वाली सूनी शाम
    और अकेले रोने-हँसने वाला मैं

    सन्नाटे के होश उड़ाने वाली चीख़
    क्या कर बैठा चुप-चुप रहने वाला मैं

    dil kee chathkhi hui ragen saaf nazar aa rahi hain aise she’ron men..behad aala behad umdaa kamaalllllllllllllll…jio mere bhai..

  4. लम्हा-लम्हा रंग बदलने वाला तू
    लम्हा-लम्हा जुड़ने-बिखरने वाला मैं

    देख नयी बातें भी करना सीख गया
    सिर्फ़ तिरी ही बातें करने वाला मैं

    तेरी याद दिलाने वाली सूनी शाम
    और अकेले रोने-हँसने वाला मैं

    सन्नाटे के होश उड़ाने वाली चीख़
    क्या कर बैठा चुप-चुप रहने वाला मैं.
    ..

    वाह वाह .
    .क्या बेहतरीन शे’र हैं …बहुत खूब …ढ़ेरों दाद भैया
    -कान्हा

  5. dada kii hi baat ko mera bhi comment maan leejiye…….

  6. नये दीवानों को देखें तो ख़ुशी होती है
    हम भी ऐसे ही थे जब आये रहे वीराने में

    आंसुओं को सियाही बनाना आ गया. हो गये बेटा आप इस दश्त के लायक़ बल्कि अब ये दश्त आपका हो गया….जीते रहिये… ख़ूब कहिये.. बड़ों का नाम रौशन कीजिये.

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