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तुझको रूठा-रूठा जब से देखा है-दिनेश नायडू

तुझको रूठा-रूठा जब से देखा है
खुद को टूटा-फूटा जब से देखा है

जाने क्यूँ मैं खुद पे हंसता रहता हूँ
इक दीवाना लड़का जब से देखा

चौंका चौंका रहता है वो जाने क्यूँ
आईना आईना जब से देखा है

मुझको तो दिन काले काले लगते हैं
रातों का सन्नाटा जब से देखा है

मेरी आँखें सहरा सहरा रहतीं हैं
दरिया अश्कों वाला जब से देखा है

और तो क्या बस इतना कहना चाहूँगा
बस तुमको ही देखा जब से देखा है

मुझको सारी लहरें अपनी लगती हैं
सागर प्यासा-प्यासा जब से देखा है

बस तेरी यादों में खोया रहता हूँ
मैंने चाँद का टुकड़ा जब से देखा है

नींद से मैंने सारे नाते तोड़ लिए
ख़ाब का अस्ली चेहरा जब से देखा है

दिनेश नायडू 09303985412

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4 comments on “तुझको रूठा-रूठा जब से देखा है-दिनेश नायडू

  1. बहुत खूब दिनेश भाई….क्या कहने
    जिंदाबाद

  2. नींद से मैंने सारे नाते तोड़ लिए
    ख़ाब का अस्ली चेहरा जब से देखा है

    ahaa..kya kehne..bahut sundar ghazal bhaiya…
    -Kanha

  3. Ye ghazal bhi khoob hai Dinesh bhaai! Waah! Waah!

  4. waah ek aur acchi ghazal dinesh…

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