4 टिप्पणियाँ

T-17/33 मिलता जहाँ न फ़ैज़ कोई ऐसा दर न था-‘शाज़’ जहानी

मिलता जहाँ न फ़ैज़ कोई ऐसा दर न था
‘उसकी गली से फिर भी हमारा गुज़र न था’

तुझ सा सख़ी न था कोई, मुझको भी फख्र है
दुनिया में ख़ाकसार सा दरयूज़ागर न था

हैरत की बात है कि दुआ भी न आयी काम
माना किसी सबब से दवा में असर न था

तसकीन इस प कर कि ख़ुदा की रज़ा न थी
कोताह कोशिशों में मिरा चारागर न था

जब खा चुके शिकस्त तो मालूम यह हुआ
इस खेल के उसूल में शामिल हुनर न था

ख़ंजर भी कुंद हो गया, वो खुद भी थक गया
आगाह मेरे ज़ब्त से बेदादगर न था

उसके मिरे ख़याल जुदा थे हरेक तौर
हमराह था वो मेरा, मिरा हमसफ़र न था

अहसासे-कमतरी का कहीं हो न वो शिकार
था यार बाम पर तो समा पर क़मर न था

तजवीज़ मैकदा ही किया उसने शुक्र है
इस अरसागाहे-दहर में वरना मफ़र न था

‘शाज़’ जहानी 09350027775

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4 comments on “T-17/33 मिलता जहाँ न फ़ैज़ कोई ऐसा दर न था-‘शाज़’ जहानी

  1. बहुत खूब शाज़ साहब, दाद कुबूल कीजिए

  2. मिलता जहाँ न फ़ैज़ कोई ऐसा दर न था
    ‘उसकी गली से फिर भी हमारा गुज़र न था’
    Hamare liye wahan har dar khula tha –lekin uski gali se khud hamara guzar na tha !! Ek manzar ban kar sawaal par sher muqammal hua hai –maani saaf hain usaki gali me na jana shair ka niji faisla hai !!! wazh –Ana !! Ya dil par kabhi lagi Thes ho sakati hai !! Wah !!!
    तुझ सा सख़ी न था कोई, मुझको भी फख्र है…..
    दुनिया में ख़ाकसार सा दरयूज़ागर न था
    Sunder sher kaha hai !! Khudi ko kar buland itana ka rang bhi kisi taur pinha hai isame !!
    तसकीन इस प कर कि ख़ुदा की रज़ा न थी
    कोताह कोशिशों में मिरा चारागर न था… hain
    Lo hum mareeze ishq ke teemaardaar hain
    Achcha agar na ho o maseeha ka kya ilaaj !!!_Ghalib
    ख़ंजर भी कुंद हो गया, वो खुद भी थक गया
    आगाह मेरे ज़ब्त से दावे तो बेहिसाब अनल-हक़ के थे मगर न था
    Dekhana hai zor kitana baazoo e qaatil me hai !!!!! Bedaadagar thak gaya aur khanjar kund ho gaya !! isi anjaam tak usko mere zabt ne pahuncha diya !! Kya khoob kya khoob !!
    उसके मिरे ख़याल जुदा थे हरेक तौर
    हमराह था वो मेरा, मिरा हमसफ़र न थाaanii aani ssssssssss
    saani misra sher ki muqammal tashreeh hai !!
    aaSaaअहसासे-कमतरी का कहीं हो न वो शिकार
    था यार बाम पर तो समा पर क़मर न था
    Beautiful …. chand sharma nahin gaya ahasase kamtari ke chalte gum ho gaya !!
    तजवीज़ मैकदा ही किया उसने शुक्र है
    इस अरसागाहे-दहर में वरना मफ़र न था
    …………agar milta na maikhana // to thukaraye huye insaan khuda jaane kahan jaate-Qateel !! muqammal tashreeh hai saa
    ‘शाज़’ जहानी sahab !! is portal par aapaka swaagat hai __Ghazal par daad !! __Mayank

  3. ‘शाज़’ जहानी साहब,

    उसके मिरे ख़याल जुदा थे हरेक तौर
    हमराह था वो मेरा, मिरा हमसफ़र न था
    कैसा अच्‍छा शै’र कहा है। वाह।

  4. जब खा चुके शिकस्त तो मालूम यह हुआ
    इस खेल के उसूल में शामिल हुनर न था

    khoobsoorat ghazal kaa ye sher khas taur par pasand aayaa.. badhai.

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