24 टिप्पणियाँ

T-17/9 जादू में अपने ऐसा नहीं, कुछ असर न था-आसिफ अमान

जादू में अपने ऐसा नहीं, कुछ असर न था
जिस पर असर की चाह थी उस पर मगर न था

जाना था आसमां के परे भी निगाह को
दुनिया तेरा जमाल ही हद्दे-नज़र न था

वो इस खबर में था कि मुझे कुछ खबर न थी
उसको खबर नहीं थी कि मैं बेखबर न था

ज़र्रे तलक दयार के थे हमसे आशना
‘उसकी गली मैं फिर भी हमारा गुज़र न था’

शायद यही सबब है फ़लक पा गया ‘अमान’
सबकी तरह वो मुन्तजिरे-बालो-पर न था

आसिफ अमान 08233418156

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

24 comments on “T-17/9 जादू में अपने ऐसा नहीं, कुछ असर न था-आसिफ अमान

  1. जादू में अपने ऐसा नहीं, कुछ असर न था
    जिस पर असर की चाह थी उस पर मगर न था

    जाना था आसमां के परे भी निगाह को
    दुनिया तेरा जमाल ही हद्दे-नज़र न था…

    ye do sher behad pasand aaye……bahut-2 mubaarakbaad Aasif Sahab…

  2. वो इस खबर में था कि मुझे कुछ खबर न थी
    उसको खबर नहीं थी कि मैं बेखबर न था
    आ.आसिफ़ साहब ‘ख़बर’का जादुई प्रभाव हिंदी अलंकारों की याद दिला रहा है |बधाई
    शायद यही सबब है फ़लक पा गया ‘अमान’
    सबकी तरह वो मुन्तजिरे-बालो-पर न था
    और इस मक्ते ने तो अपने आप को अमर कर दिया है |ढेरों दाद ……वाह

  3. WOH IS KHABAR MEN THA KE MUJHE KUCH KHABAR NA THI.
    US KO KHABAR NAHIN THI KE MAIN BE – KHABAR NA THA.

    BHOT KHOOB,

  4. आसिफ़ साहब ख़ूब ग़ज़ल हुई है.बधाई स्वीकार कीजिये.

  5. वाह-वाह. पूरी ग़ज़ल रवां-दवां…बहुत उम्दा कलाम.. दिली दाद क़ुबूल फ़रमाइये

  6. आसिफ साहब,
    बहुत अच्‍छी ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद और दाद कबूल करें।
    वाह…वाह… क्‍या बात है।
    सादर
    नवनीत

  7. aaasif bhai bahut umda ghazal hui hai.. matle aur girah par bataure-khaas daad qubulen….

  8. आसिफ़,

    आपकी ग़ज़ल अच्‍छी लगा और मतला बढ़ कर है। दाद। बल्कि दुआ।

  9. जादू में अपने ऐसा नहीं, कुछ असर न था
    जिस पर असर की चाह थी उस पर मगर न था

    आसिफ भाई !! आपका मतला अपनी सादगी और गहराई के सबब दिल जीत ले गया !!
    तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो
    जहां उम्मीद हो उसकी वहां नहीं मिलता –निदा

    जाना था आसमां के परे भी निगाह को
    दुनिया तेरा जमाल ही हद्दे-नज़र न था
    नया और सुन्दर शेर !!

    वो इस खबर में था कि मुझे कुछ खबर न थी
    उसको खबर नहीं थी कि मैं बेखबर न था
    कमाल की जादूगरी पैदा कर दी है इस शेर के शिल्प ने …
    अंदाज़ अपना देखते हैं आईने में वो जैसा। । टीनेज ग्रुप से लेकर अदबी हलको में पसंद किया जाएगा इस शेर को।

    ज़र्रे तलक दयार के थे हमसे आशना
    ‘उसकी गली मैं फिर भी हमारा गुज़र न था’
    वाह !!

    शायद यही सबब है फ़लक पा गया ‘अमान’
    सबकी तरह वो मुन्तजिरे-बालो-पर न था

    बहुत अच्छा शेर है तहदार शाइरी है ये।

    आसिफ अमान भाई !!! सुन कर भी और पढ़ कर भी ग़ज़ल बहुत पसंद आई — मयंक

  10. mukhtasar magar asaraNgez ghazai hai Amaan sahib…daad haazir hai
    dr.azam

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s

%d bloggers like this: