36 Comments

T-13/8 गौतम राजरिशी-चाँद ज़रा जब मद्धम-सा हो जाता है

चाँद ज़रा जब मद्धम-सा हो जाता है
अम्बर जाने क्यूँ तन्हा हो जाता है

चोट लगी है जब-जब नींद की रूहों को
जिस्म भी ख़्वाबों का नीला हो जाता है

तेरी गली में यूँ ही आते-जाते बस
ऐसा-वैसा भी कैसा हो जाता है

उसके फ़ोन की घंटी पर कमरा कैसा
लाल-गुलाबी सपनीला हो जाता है

येल्लो पोल्का डॉट दुपट्टा तेरा उड़े
तो मौसम भी चितकबरा हो जाता है

अलबम का इक-इक फ़ोटो जाने कैसे
शब को नॉवेल का पन्ना हो जाता है

तेरी-मेरी नज़रों का बस मिलना भर
मेरे लिये वो ही बोसा हो जाता है

उस नीली खिड़की के पट्टे का खुलना
नीचे गली में इक क़िस्सा हो जाता है

इश्क़ का ‘ओएसिस’ हो या हो यादों का
“धीरे-धीरे सब सहरा हो जाता है”

मैं तो यूँ ही बुनता हूँ ग़ज़लें अपनी
नाम का तेरे क्यूँ हल्ला हो जाता है

-गौतम राजरिशी {09419029557, 01955-213171}

*ओएसिस = मरुद्यान

Advertisements

About Lafz Admin

Lafzgroup.com

36 comments on “T-13/8 गौतम राजरिशी-चाँद ज़रा जब मद्धम-सा हो जाता है

  1. ये नीला बड़ा ज़हरीला है भैय्या

    आपके इश्टाइल की ग़ज़ल, ये दो शेर अहा

    चोट लगी है जब-जब नींद की रूहों को
    जिस्म भी ख़्वाबों का नीला हो जाता है

    तेरी गली में यूँ ही आते-जाते बस
    ऐसा-वैसा भी कैसा हो जाता है

    लाजवाब …………

  2. bhai wah, achhi ghazal kahi hai, mubarak ho

  3. गौतम भाई साहब
    जय हिंद।

    बहुत खूबसूरत ग़ज़ल हुई। हमेशा की तरह कुछ अलग और दिलचस्‍प।
    शुक्रिया

    नवनीत

  4. kaun se se sher ki tareef kare’n kaun. si chhode’n…puri ghazal bala ki hai …
    is Umdaa ghazal ke liye badhai kubul farmaye’n sir ..
    मैं तो यूँ ही बुनता हूँ ग़ज़लें अपनी
    नाम का तेरे क्यूँ हल्ला हो जाता ह

    uffff….kya kehne
    saadar..
    Apka Anuj
    Kanha

  5. अलबम का इक-इक फ़ोटो जाने कैसे
    शब को नॉवेल का पन्ना हो जाता है

    Shab ko novel ka panna ho jaata hai… Waah kya kehne 🙂

    तेरी गली में यूँ ही आते-जाते बस
    ऐसा-वैसा भी कैसा हो जाता है

    Waah… Gautamji… Bahut achhi lagi aapki gazal… Dili mubarakbaad 🙂

  6. वाह …गौतम साहब अलग अंदाज़ की ग़ज़ल हुई है बधाई …

  7. गौतम भाई

    पूरी ग़ज़ल अच्छी है . हर जगह आपकी शिनाख्त हो ही जाती है ….. !

    तेरी-मेरी नज़रों का बस मिलना भर
    मेरे लिये वो ही बोसा हो जाता है
    इस शेर पर सैकड़ों दाद !!!!!!
    मयंक भाई की निहायत खूबसूरत टिप्पणी को कट-पेस्ट करने का जी चाह रहा है !!!!

  8. गौतम !! मैने एक लम्बा समय दिल्ली कैण्टोमेण्ट में गुज़ारा है !! गोपीनाथ मार्केट से आर्मी क्लब तक रोज़ की परेड और ब्रार स्क्वायर से नरायना रीगल तक का सफर –आज से 33 बरस पहले – अब तो वहाँ सब कुछ बदल गया है –लेकिन यह भाषा जो आपकी ग़ज़लों में मिलती है और यह माहौल जो आपके शब्दों में मिलता है – ये बिन्दास बोल –यह प्रेम ,बेफिक्र अभिव्यक्ति-मुझे कई बार 33 बरस पहले खींच ले जाते हैं –कोई बड़ी दुखद स्म्रति भी इन चित्रों के साथ जीवित हो जाती है – खैर वो दीगर है –
    तेरी गली में यूँ ही आते-जाते बस
    ऐसा-वैसा भी कैसा हो जाता है
    क्या शेर कह दिया भाई !! कमाल है !! आपको शायद खुद इल्म बाद में हुआ होगा कि कि आपने लाजवाब शेर कह दिया। यह गज़ल हमारे आज के माहुल के लिये बेहद मुफीद है –ग़ज़ल को अवाम तक और तीनेजर ग्रुप तक ले जने वाली और इसके सामईन ग्रुप में इज़ाफा करने वाली –साथ ही अश आर की गहराई एक अतिरिक्त पहलू है जो तब्सरानिगारो और तनक़ीदकारो के साम्ने भी ग़ज़ल का परचम बुलन्द रखती है – इस ज़दीदियत को सलाम आपको पढने वाले रोज़ बढेंगे – गज़्ल के दीगर अश आर भी पूरी तारेफ के हकदार हैं –मयंक

    • मयंक भाई… आपकी टिप्पणी जिस ग़ज़ल पर मिल जाये और वो भी इतनी सारगर्भित, वो ग़ज़ल तो यूं ही मुकम्मल हो जाती है | सब आपका स्नेह है सर जी !

  9. अलबम का इक-इक फ़ोटो जाने कैसे
    शब को नॉवेल का पन्ना हो जाता है

    पूरी ग़ज़ल की तो बात ही छोड़ें इस अकेले शेर ने जान लेली ….उफ्फ्फ मियां लफ़्ज़ों से क्या कमाल करते हो —जियो .

    नीरज

  10. उम्दा ग़ज़ल हुई है गौतम भैया! कहन का आपका अनूठा अंदाज़ हर शेर में मौजूद है. दिली दाद हाज़िर है!

  11. वाह, आप इतना अच्छा कैसे कह लेते हैं? साधु।

  12. bahut acchi ghazal hui hai….

    चोट लगी है जब-जब नींद की रूहों को
    जिस्म भी ख़्वाबों का नीला हो जाता है
    is she’r se pata chalta hai ki khaab aur neend judwa hain… “P.. bahut accha sher hai gautam bhai…

    तेरी गली में यूँ ही आते-जाते बस
    ऐसा-वैसा भी कैसा हो जाता है
    ye she’r bahut hi umdaa hai…. daad qubulen…:)

  13. चाँद ज़रा जब मद्धम-सा हो जाता है
    अम्बर जाने क्यूँ तन्हा हो जाता है…खूबसूरत
    बहुत सुन्दर ग़ज़ल.

  14. तेरी गली में यूँ ही आते-जाते बस
    ऐसा-वैसा भी कैसा हो जाता है
    xx
    इश्क़ का ‘ओएसिस’ हो या हो यादों का
    “धीरे-धीरे सब सहरा हो जाता है”

    मैं तो यूँ ही बुनता हूँ ग़ज़लें अपनी
    नाम का तेरे क्यूँ हल्ला हो जाता है
    in sheron ne jaan le li!

  15. चाँद ज़रा जब मद्धम-सा हो जाता है
    अम्बर जाने क्यूँ तन्हा हो जाता है…खूबसूरत

    उसके फ़ोन की घंटी पर कमरा कैसा
    लाल-गुलाबी सपनीला हो जाता है……क्य बात है ,खूब

    अलबम का इक-इक फ़ोटो जाने कैसे
    शब को नॉवेल का पन्ना हो जाता है….बहुत ही गहरी अभिवयक्ति ,enormous expressions ,memories unfolds the past in the pics.

    तेरी-मेरी नज़रों का बस मिलना भर
    मेरे लिये वो ही बोसा हो जाता है

    बहुत अच्छी ग़ज़ल हुई है ,बहुत खूब ,वाह वाह !

  16. अलबम का इक-इक फ़ोटो जाने कैसे
    शब को नॉवेल का पन्ना हो जाता है

    बहुत बढ़िया… अच्छी ग़ज़ल.

  17. उसके फ़ोन की घंटी पर कमरा कैसा
    लाल-गुलाबी सपनीला हो जाता है

    purani yaden jaag uthi. Prem preet aur pyar kabhi nahi badalta. har yug me wahi hai. Zabardast.

  18. Gautamji
    Vaise to saari ghazal hee umda hai, lekin girah ka sher bahut hee khoobsurat aur dilchasp hai..wah wah wah

  19. उसके फ़ोन की घंटी पर कमरा कैसा
    लाल-गुलाबी सपनीला हो जाता है

    येल्लो पोल्का डॉट दुपट्टा तेरा उड़े
    तो मौसम भी चितकबरा हो जाता है
    गौतम सा प्रणाम बहुत बहुत बधाई ,ज़दीद शायरी में आपके यह प्रयोग अलग मुकाम बनायेगे आने वाली नस्ले शेर की भाषा पढकर कह देगी गौतम राजरिशी का शेर है ढेरों दाद कबूल करे

  20. गौतम अच्छी ग़ज़ल कही। अगर ये सुब्ह है तो शाम का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

    तेरी गली में यूँ ही आते-जाते बस
    ऐसा-वैसा भी कैसा हो जाता है

Your Opinion is counted, please express yourself about this post. If not a registered member, only type your name in the space provided below comment box - do not type ur email id or web address.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: