24 टिप्पणियाँ

T-12/10 हवा के सिवा है जो रफ़्तार में-नवीन सी. चतुर्वेदी

हवा के सिवा है जो रफ़्तार में।
असर उसका डाल अपने किरदार में॥

हदें हम पे हँसती रहीं और हम,
तलाशा किये तर्क तकरार में,
भला हो भरम का जो भरमा लिया,
वगरना धरा क्या है संसार में॥

हमें यूँ अज़ल से ही मालूम था,
है किस-किस का इसरार इस रार में,
मगर क्या करें हम भी फँस ही गये,
ख़ला की बलाओं की गुफ़्तार में॥

चला चाक अपना ख़ला के कुम्हार,
कई अक़्स हैं अनगढ़े, ग़ार में,
मुहब्बत की रंगत में वहशत भी घोल,
उजाला तो हो कूचा-ए-यार में॥

वो लावा जो दुनिया बनाता भी है,
न कुहसार पे है न कुहसार में,
नया नूर जिस का ढिंढोरा पिटा,
न रुख़सार पे है न रुख़सार में॥

कहाँ सब ज़हीनों को दिखती है खाद,
जी हाँ! ज़र्द पत्तों के अम्बार में,
तेरी बातें हैं “शुद्ध-कूड़ा” ‘नवीन’,
इन्हें कौन पूछेगा बाज़ार में॥

नवीन सी. चतुर्वेदी 09967024593

 

PS : यह एक क़ताबन्द ग़ज़ल है और इस में विभिन्न अलंकारों का प्रयोग प्रायोगिक तौर पर किया गया है।

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24 comments on “T-12/10 हवा के सिवा है जो रफ़्तार में-नवीन सी. चतुर्वेदी

  1. नवीन भाई साहब, लाजवाब शेर हुए हैं सभी
    उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें।

  2. Chaahakar bhi na likh paraha hoon, khogaye shabd ,ab kya kahoon main. Naaz tum par jamana kare ab , Nam goonje tera Mahafilon men. Navin Maa Saraswati ki kripa tum par banirahe. Desh,Samaj ka nam roshan karo. Bahut achchha.

    • आप का बहुत-बहुत शुक्रिया प्रमोद जी। आप के स्नेह-सिक्त उत्साह-वर्धन के लिये हृदयातल से आभारी हूँ। मैं आप को पहिचान नहीं पा रहा। यदि आप को उचित लगे तो नाचीज़ से 9967024593 पर बात करने की कृपा करें। अपने शुभ-चिंतक से बात करने के लिये इच्छुक हूँ।

  3. रवायत से अलग लफ़्ज़ों का इस्तेमाल वाह नवीन जी बधाई अच्छी ग़ज़ल के लिये…

  4. मुहब्बत की रंगत में वहशत भी घोल
    उजाला तो हो कूचा-ए-यार में
    BEHTAREEN SHER
    तेरी बातें हैं “शुद्ध-कूड़ा” ‘नवीन’
    इन्हें कौन पूछेगा बाज़ार में
    MAQTA INKESAARI KA MAZHAR HAI ANDAAZ PASAND AAYA.

  5. अच्छी ग़ज़ल है नवीन भाई! दाद हाज़िर है!

  6. Ab aap maahir ho gaye baithe Thale hi nahin lete lete bhi Ghazal kahne lage !! aur sher bhi kamaal ke kahe hain !! — Wah wapas laut kar vistar se bbat karate hain –Mayank

    • प्रणाम भाई साब, बड़ों का आशीर्वाद ही हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहता है, फोन पर आप की टिप्पणी प्राप्त हो गयी मुझे 🙂

      मौजूदा दौर में अतिशय व्यस्त होने के वावजूद आप लफ़्ज़ के लिए समय निकाल कर निरन्तर अपनी उपस्थिति बनाये हुये हैं – यह आप की विशेषता है। आभार। प्रणाम स्वीकार करें।

  7. Naveen Bhaiyya… Aapki gazal ki ravangi ne dil jeet liya… Waah…Ek bahaav hai aapki gazal mein… Kitni khoobsurati se nibhaya gaya hai har sher ko is ravangi ke sath 🙂

    aur is sher ki jitni taareef karu kam hai :

    भला हो भरम का जो भरमा लिया
    वगरना धरा क्या है संसार में

  8. भला हो भरम का जो भरमा लिया
    वगरना धरा क्या है संसार में
    navin sb namskar, puri gazal purasar he.takheeyul ki ek nai parwwaz he.dilimubarkbaad

  9. भैया प्रणाम
    शुद्धता बची ही कहाँ है….. बहरहाल आपने कूड़े में शुद्धता बचा ली, उम्दा तरीका इस ग़ज़ल को परोसने का

    कहाँ सब ज़हीनों को दिखती है खाद
    जी हाँ! ज़र्द पत्तों के अम्बार में
    तेरी बातें हैं “शुद्ध-कूड़ा” ‘नवीन’
    इन्हें कौन पूछेगा बाज़ार में
    पर बारम्बार बधाई !!!!

  10. मक़्ता पसंद आया नवीन जी ….. ‘कूड़ा’ के साथ ‘शुद्ध’ शब्द जोड़ कर ‘कूड़े’ की आभा बढ़ा दी है आपने….नया शब्द प्रयोग है…..दाद क़ुबूल कीजिये भाई.

  11. क्या कहने ।।।।नवीन भाई
    लाजवाब शेर हुए हैं सभी
    उम्दा ग़ज़ल के लिए बधाई स्वीकार करें जनाब

  12. अच्छे अशआर नवीन जी.

    भला हो भरम का जो भरमा लिया
    वगरना धरा क्या है संसार में

    बहुत बढ़िया…

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